Current Affairs February 20, 2018

Current-Affairs-February-20-2018

Current Affairs February 20, 2018 को सभी अखबारों जैसे द हिंदू, द इकोनॉमिक टाइम्स, प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस और बिजनेस स्टैंडर्ड का अध्ययन कर तैयार किया गया है। यह जानकारी पाठक को UPSC, SSC, Banking, Railway और अन्य सभी प्रतियोगिता परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन में सहायक होगी।

महानदी जल विवाद हेतु ट्रिब्यूनल स्थापना

केंद्रीय कैबिनेट ने अंतरराज्यीय नदी विवाद अधिनियम 1956 के तहत महानदी जल विवाद के समाधान के लिए एक क्रिमिनल की स्थापना संबंधी प्रस्ताव को सहमति प्रदान की। हमें ध्यान देना चाहिए कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्य के मध्य लंबे समय से महानदी जल विवाद है।

यह ट्रिब्यूनल महानदी बेसिन की समग्र उपलब्धता और प्रत्येक राज्य के योगदान और वर्तमान उपयोग और भविष्य की विकास क्षमता के आधार पर जल साझाकरण को निर्धारित करेगा। यह ट्रिब्यूनल जल संबंधित मुद्दों से निपटने हेतु अनुभव जल संसाधन विशेषज्ञ की सेवाएं भी लेगा।

अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अनुसार, ट्रिब्यूनल में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नामांकित अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य शामिल होंगे।

अंतरराज्यीय नदी विवाद अधिनियम 1956 के प्रावधानों के अनुसार टर्मिनल को 3 साल की अवधि के भीतर अपनी रिपोर्ट और निर्णय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

Source: PIB


भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय: गुरूग्राम

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा गुरुग्राम हरियाणा के बिनोला और बिलासपुर में भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधी प्रस्ताव को सहमति प्रदान की। यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड मुख्यालय (NH 8) से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया जा रहा है।

यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन, रक्षा प्रबंधन और रक्षा प्रौद्योगिकी में उच्च शिक्षा का विकास करेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित सभी पहलुओं पर आंतरिक एवं बाह्य दोनों तरह से नीति उन्मुख अनुसंधान को बढ़ावा देगा।

यह विश्वविद्यालय पैरा फ़ैरीली बल, इंटेलिजेंस सर्विसेज, डिप्लोमेट्स, अकादमिक और रणनीतिक योजनाकार अधिकारियों को उच्च शिक्षा प्रदान करेगा।

इस क्रम में केंद्र सरकार ने दिल्ली जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी यातायात के विघटन के लिए NH 8 पर बस खाड़ी के निर्माण संबंधी प्रस्ताव को भी सहमति प्रदान की।

Source: PIB


अनियमित जमा योजना और चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निवेशकों की बचत की रक्षा के लिए एक प्रमुख नीतिगत पहल के तहत निम्नलिखित बिलों को पेश करने की मंजूरी प्रदान की। यह बिल है: (1) अनियमित जमा योजना विधेयक 2018 और (2) चिटफंड संशोधन विधेयक 2018

अनियमित जमा योजना विधेयक 2018

अनियमित जमा योजना विधेयक, 2018 देश में अवैध जमा योजनाओं के खतरे से निपटने के लिए एक व्यापक कानून प्रदान करता है।

यह अनियमित जमा संबंधी योजनाओं को प्रतिबंधित करने का अधिकार प्रदान करता है।

यह सक्षम प्राधिकारी को शक्तियां और संपत्ति संलग्न करने की शक्तियां प्रदान करता है।

यह किसी भी अनियमित जमा योजना में विज्ञापनों को बढ़ावा देने, संचालन, विज्ञापन जारी करने या स्वीकार करने से जमा जमाकर्ताओं को रोकता है।

यह विधेयक तीन अलग-अलग प्रकार के अपराधों को नामित करता है: 1. अनियमित जमा योजना चलाना, 2. विनियमित जमा योजनाओं में धोखाधड़ी और 3. अनियमित जमा योजनाओं के संबंध में गलत प्रलोभन

चिटफंड संशोधन विधेयक 2018

यह संशोधित विधेयक चिटफंड अधिनियम 1982 में संशोधन की अनुशंसा करता है।

यह चिटफंड क्षेत्र में सुधारात्मक विकास की सुविधा के लिए और चिटफंड उद्योग की बाधाओं को दूर करने के साथ अन्य वित्तीय उत्पादों के लिए लोगों को अधिक सक्षम बनाता है।

Source: PIB


चारधाम महामार्ग परियोजना के तहत सिलकेरा बेंड- बार्कट सुरंग

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने उत्तराखंड में 4.531 किमी लंबी 2 लेन लेन सिलकेरा बेंड- बार्कट सुरंग के निर्माण को मंजूरी दे दी।

यह सुरंग धारसू-यमूनोत्री खंड के बीच का रास्ता 25.4 किमी और चैनगे उत्तराखंड में 51 किलोमीटर की दूरी कम कर देगी।

यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग 144 ( पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-94) पर प्रस्तावित है।

यह परियोजना बहु प्रत्याशित चारधाम महामार्ग परियोजना के तहत वित्त पोषित होगी।

इस परियोजना के निर्माण अवधि 4 वर्ष की है, जिससे 1119.69 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा, जिसमें अग्रिम 4 साल तक के सुरंग के रखरखाव और संचालन लागत को भी शामिल किया गया है।

इस सुरंग का निर्माण, देश के भीतर क्षेत्रीय सामाजिक-आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन को प्रोत्साहित करने, चारधम यात्रा पर धाम में से एक यमुतोत्री को सभी मौसम संपर्क प्रदान करेगा।

यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तैयार कराएगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड वर्ष 2014 में अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर राजमार्ग के विकास के लिए स्थापित केंद्रीय स्वामित्व वाली कंपनी है।

Source: PIB


झांसी-माणिकपुर और भीमसेन-खैरार रेल लाइन विद्युतीकरण

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 425 किमी लंबी झांसी-माणिकपुर और भीमसेन-खैरार लाइन को द्विगुणीकरण (Double) और विद्युतीकरण परियोजना को मंजूरी दी है।

यह परियोजना झांसी, महोबा, बांदा, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट धाम और मध्य प्रदेश के छतरपुर जिलों को कवर करेगी, जिसे वर्ष 2022 तक 4955.72 करोड़ रुपए के बजट से तैयार किया जाएगा।

यह रेल लाइन द्विगुणीकरण और विद्युतीकरण यात्री ट्रेनों की समय सीमा में सुधार के साथ बुंदेलखंड क्षेत्र के समग्र विकास में सहयोग प्रदान करेगी।

यह विद्युतीकरण खुजराहो की कनेक्टिविटी में सुधार करेगी जो एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है और क्षेत्र में पर्यटन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी।

यह परियोजना रेलगाड़ियों की गति में इजाफा करने के साथ कार्बन उत्सर्जन को भी कम करेगी। इसके अतिरिक्त ईंधन आयात निर्भरता को भी कम करने में सहयोग प्रदान करेगी।

Source: PIB


कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत कोयला खान नीलामी कार्यप्रणाली

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने कोयला खानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 और खनन और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कोयले की बिक्री के लिए कोयला खानों / ब्लॉकों की नीलामी की कार्यप्रणाली को मंजूरी दे दी है।

यह कार्यप्रणाली वर्ष 1973 के कोयला खदान राष्ट्रीयकरण के उपरांत वाणिज्य कोयला खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी के लिए एक सबसे महत्वकांक्षी सुधार प्रणाली होगी।

कोयला खान (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1973 के प्रावधानों के तहत 1993 से विभिन्न सरकारों और निजी कंपनियों को आवंटित 204 कोयला खानों / ब्लॉक को रद्द कर दिया गया था। जिसके उपरांत केंद्र सरकार द्वारा कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक 2015 पारित किया गया। यह विधेयक कोयला खानों की बिक्री के लिए नीलामी आवंटन व्यवस्था के प्रावधान करता है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 की कार्यप्रणाली पारदर्शिता और व्यापार को सुनिश्चित करती है।

हमें ध्यान देना चाहिए कि वर्तमान समय में ताप विद्युत संयंत्रों से भारत का 70% बिजली उत्पन्न होता है। यह सुधार कार्यप्रणाली उपभोक्ताओं के लिए सस्ती बिजली की कीमतों को सुनिश्चित करने के लिए आश्वस्त कोयला आपूर्ति, कोयले के जवाबदेह आवंटन और सस्ती कोयला सुनिश्चित करेगा।

Source: PIB

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