Sisodia Dynasty of Mewar

Major & Important facts about Sisodia Dynasty Mewar

अगस्त 1303 में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा ऐतिहासिक लड़ाई में चित्तौड़गढ़ किले पर कब्जा किया गया, जिसके परिणाम स्वरुप मेवाड़ के गुहिल वंश शासन का अंत हुआ। अलाउद्दीन खिलजी द्वारा तत्कालीन दिल्ली सल्तनत के वफादार और जालोर के शासक मालदेव को मेवाड़ का राज्य भार सौंपा गया। मालदेव द्वारा अपनी पुत्री का विवाह हमीर सिंह प्रथम के साथ किया गया, जिन्होंने पुन्ह मेवाड़ राज्य का प्रशासन मालदेव के हाथों से छीन लिया।

मेवाड़ का सिसोदिया वंश:

राणा हमीर सिंह प्रथम (1326-64)

वह सिसोदिया वंश के संस्थापक थे।
जालोर के शासक मालदेव की पुत्री के साथ विवाह किया।
राणा हमीर सिंह ने 1326 में मालदेव को हराकर पुन्ह मेवाड़ की स्थापना की।
उनके द्वारा चित्तौड़गढ़ किले में अन्नपूर्णा माता का मंदिर का निर्माण कराया गया।

खेत सिंह (1364-82)

राणा हमीर के उत्तराधिकारी थे।
उन्होंने बाकरोल में दिल्ली के सुल्तान को हराकर मंडलगढ़, अजमेर, मंदसोर और चप्पा रियासतों पर पुनः कब्जा किया।
कुंभलगढ के शिलालेखों के अनुसार उन्होंने तत्कालीन गुजरात के सुल्तान जफर खान को भी शिकस्त दी।

राणा लक्खा सिंह (1382- 1421)

वह राणा खेत सिंह के जेष्ठ पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
वह सबसे सफल महाराणा में से एक थे।
उनके समय में टिन और चांदी की खानों की खोज भीलो द्वारा की गई थी।

राणा मुखल/मोकाल सिंह (1421-1433)

वह राणा लक्खा सिंह के पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
राणा चुंडा द्वारा अपने अनुज मोकाल सिंह के लिए महाराणा के पद का त्याग किया गया।

राणा कुंभा (1433-68)

महाराणा मोकाल सिंह के जेष्ठ पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
इनके द्वारा मेवाड़ की रक्षा हेतु 32 किलो का निर्माण किया गया जिसमें कुंभलगढ़ का प्रसिद्ध किला भी शामिल है।
उनके द्वारा गीतागोविंदा, सुद्रप्राबंध, और कामराज-रतिसरार पर संगीत राज और रसिक-प्रिया की टिप्पणी भी लिखी गई।
उन्होंने माल्वा के महमूद खिलजी, गुजरात के कुतुबुद्दीन और मारवाड़ के राव जोधा का सामना भी किया।

राणा उदय सिंह (1468-73)

राणा रायमुल (1473-1998)

वह महाराणा कुंभा के पुत्र थे।
उन्होंने अपने भाई उदय सिंह के साथ दरीमपुर और पनगढ़ का युद्ध लड़ा।
उन्होंने राव जोधा की बेटी श्रीधरदेवी से विवाह कर मेवाड़ और मारवाड़ की शत्रुता का अंत किया।

राणा सांगा (संग्राम सिंह) (1508-1528)

वह राणा रायमल के पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
उन्होंने गागरोन के युद्ध में मालवा के सुल्तान को हराया।
उन्होंने खातोली और धौलपुर के युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराया।

राणा रतन सिंह द्वितीय (1528-1531)

राणा विक्रमादित्य सिंह (1531-1536)

उनके शासनकाल 1534 में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया।
राणा सांगा की रानी करनवती द्वारा हुमायूं को रक्षा के लिए राखी भेजी गई।

राणा वनवीर सिंह (1536-1540)

वनवीर सिंह द्वारा विक्रमादित्य सिंह की हत्या की गई।
उदय सिंह द्वितीय की हत्या की स्थिति में पन्नाधाय द्वारा अपने पुत्र का बलिदान दिया गया।

राणा उदय सिंह द्वितीय (1540-1572)

उदय सिंह द्वितीय को मेवाड़ का शासक बनाया गया।
9 मई -1540 को “महाराणा” प्रताप का जन्म हुआ।
इनके शासनकाल में उदयपुर की स्थापना की गई।
उनके द्वारा मालवा के शासक बाज बहादुर को शरण देने पर अकबर ने अक्टूबर 1563 में मेवाड़ पर हमला किया गया।

महाराणा प्रताप (1540- 1597)

वह राणा उदय सिंह द्वितीय के जेष्ट पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर से पराजित हुए।
उन्हें प्रसिद्ध ब्रिटिश पुरातत्विक जेम्स टॉड द्वारा “Leonidas of Rajasthan” द्वारा पुकारा गया।

राणा अमर सिंह (1597-1620)

वह महाराणा प्रताप के जेष्ट पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
उन्होंने जहांगीर के साथ कई युद्ध लड़े।
अंततः उन्होंने जहांगीर के साथ शांति वार्ता कर मुगल दरबार में अपनी उपस्थिति स्वीकार की।

राणा करण सिंह द्वितीय (1620-1628)

राणा जगत सिंह (1628-1652)

राणा राज सिंह (1652-1680)

उनके द्वारा औरंगजेब के जजिया टैक्स का विरोध किया गया।
इनके द्वारा नाथद्वारा में मथुरा के श्रीनाथजी की मूर्ति की स्थापना की गई।
इनके द्वारा भारत की मानव निर्मित दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील राजसमंद झील का निर्माण करवाया गया।

राणा जय सिंह (1680-1698)

राणा अमर सिंह द्वितीय (1698–1710)

राणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710-1734)

राणा जगत सिंह द्वितीय (1734-1751)

राणा प्रताप सिंह द्वितीय (1751-1754)

राणा राज सिंह द्वितीय (1754-1762)

राणा अरी सिंह द्वितीय (1762-1772)

राणा हमीर सिंह द्वितीय (1772-1778)

राणा भीम सिंह (1778-1828)

राणा जवान सिंह (1828-1838)

राणा सरदार सिंह (1828-1842)

राणा स्वरुप सिंह (1842-1861)

राणा शम्भू सिंह (1861-1874)

महाराणा स्वरूप सिंह के दत्तक पुत्र थे।
उनके द्वारा बालिकाओं की शिक्षा हेतु प्रथम स्कूल स्थापित किया गया और इस तरह सभी के लिए शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा दिया।
उन्होंने सती पाठ को रोकने के लिए विशेष उपायों को लागू किया।

राणा सज्जन सिंह (1874-1884)

राणा फतेह सिंह (1884-1930)

राणा भूपल सिंह (1930-1947)

28 जुलाई 1921 को मेवाड़ में कुछ सामाजिक अशांति के बाद, फतेह सिंह को औपचारिक रूप से पद छोड़ भूपल सिंह को शासक बनाना पड़ा।
18 अप्रैल 1948 को राजस्थान के राजप्रमुख बन गए।
जानकारी का प्रमुख केंद्र: सिसोदिया वंश (Wikipedia)

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