Rulers of Bikaner

Major & Important facts about Rulers of Bikaner

वर्ष 1465 में राव बीका ने अपने पिता की आज्ञानुसार मारवाड़ (जोधपुर) छोड़ दिया और अपने परिवार की बहुमूल्य विरासत के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए बीकानेर की स्थापना की। राव बीका ने अपनी यात्रा के दौरान देशनोक पर स्थित करणी माता से आशीर्वाद लेकर तत्कालीन जाट परिवारों के आंतरिक प्रतिद्वंदिता का लाभ उठाकर राजस्थान के “जांगलदेश” क्षेत्र में अपने राज्य का निर्माण किया। राव बीका द्वारा राजधानी के लिए चयनित स्थान नेहरा जाट समुदाय का अधिकार क्षेत्र था। नेहरा समुदाय की इच्छा अनुसार राव बीका ने अपने प्रदेश का नाम “बिका” “नैरा” रखा। जिसे बाद में बीकानेर में तब्दील कर दिया गया।

बीकानेर के राठौड़ शासक:

राव बीका (1465-1504)

बीकानेर राज्य के संस्थापक और राव जोधा के पुत्र थे।
वह राठौड़ राजवंश में बीका राठौड़ के संस्थापक थे।
उन्होंने भाटी (जैसलमेर) की पुत्री से विवाह किया।

राव नौरोजी (1504-1505)

राव लूणकरण (1505-1526)

राव जैत सिंह (1526-1542)

वह तत्कालीन समय के सबसे सफल शासक थे।
मारवाड़ के राव मालदेव की सेनाओं के साथ युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए।

राव कल्याण सिंह (1542-1571)

वह राव जैत सिंह के उत्तराधिकारी थे।
जिन्हें मालदेव की सेनाओं द्वारा खदेड़ने के कारण पंजाब जाना पड़ा।
वहां उन्होंने शेरशाह सूरी के साथ मिलकर मुगल शासक हुमायूं को हराया।
शेरशाह सूरी के सहयोग से वर्ष 1545 में राव मालदेव से उन्होंने अपना राज्य पुनः जीत कर प्राप्त किया।

राजा राज (राय) सिंह प्रथम (1571-1611)

वह राव कल्याण सिंह के उत्तराधिकारी थे।
मुगल सम्राट अकबर की ओर से दक्कन में कार्यरत रहे।
बुरहानपुर के सूबेदार का भी अधिकार रखते थे।
उन्हें मुगल सम्राट अकबर द्वारा ‘राजा’ की उपाधि प्रदान की गई।

राय दलपत सिंह दलीप (1612-1613)

वह राजा राज (राय) सिंह प्रथम के जेष्ट पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
इनकी हत्या जहांगीर के सहमति से इनके छोटे भाई सूरत सिंह द्वारा की गई।

राय सूरत सिंह भुरटिया (1613-1631)

राव करन सिंह (1631-1667)

वह सम्राट औरंगजेब द्वारा नियुक्त किए गए थे।
वह प्रथम शासक थे, जिन्हें “जंगलपत बादशाह” की पदवी से नवाजा गया।

महाराजा राव अनुप सिंह (1669-1698)

औरंगजेब ने 1 मई को ‘महाराजा’ शीर्षक प्रदान किया।
उन्होंने 1672 में साल्हेर में डेक्कन अभियान में, 1675 में बीजापुर और 1687 में गोलकोंडा की घेराबंदी में सहयोग प्रदान किया।
वह औरंगाबाद (1677-1678) के प्रशासक भी रहे।

महाराजा राव सरुप सिंह (1698-1700)

महाराजा राव सुजन सिंह (1700-1735)

महाराजा राव जोरावर सिंह (1735-1746)

महाराजा राव गज सिंह (1746-1787)

सम्राट आलमगीर द्वितीय द्वारा अपनी मुद्रा (सिक्का) प्रकाशित करने की अनुमति प्राप्त की।

महाराजा राव राय सिंह द्वितीय राज सिंह (1787-1787)

महाराजा राव सूरत सिंह (1787-1828)

ईस्ट इंडिया कंपनी के एलाइंस के रूप में के रूप में वर्ष 1818 में सम्मिलित हुए।

महाराजा राव रतन सिंह (1828-1851)

महाराजा राव सरदार सिंह (1851-1872)

1857 के भारतीय विद्रोह के खिलाफ ब्रिटिश को सहायता प्रदान की।

महाराजा राव डुंगर सिंह (1872-1887)

राजस्थान में बिजली (विद्युत) की सेवा प्रारंभ की।
उन्होंने एक पुलिस बल, एक अस्पताल और एक आधुनिक प्रशासनिक प्रणाली भी स्थापित की है।

महाराजा सर राव गंगा सिंह (1887-1943)

प्रथम विश्वयुद्ध में फ्रांस और फ्लैंडर्स में नियुक्त किए गए।
28 जून 1919 को भारत की ओर से वर्साइल की संधि पर हस्ताक्षर किए।

महाराजा सर राव सादुल सिंह (1943-1950)

7 अगस्त 1947 को भारत के डोमिनियन में प्रवेश प्रावधान पर हस्ताक्षर किए।
30 मार्च 1949 को अपने राज्य का वर्तमान राजस्थान में विलय किया।

महाराजा सर राव करणी सिंह (1950-1971)

वर्ष 1952-1977 तक बीकानेर के लोकसभा सदस्य रहे।
28 दिसंबर 1971 को भारतीय संविधान में रियासतों के शासकों संबंधी संशोधन विधेयक के तहत वह बीकानेर के अंतिम शासक बने।

जानकारी का प्रमुख केंद्र: बीकानेर राज्य (Wikipedia)

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