देश की प्रथम बायो रिफाइनरी

8 मई 2017 को सड़क परिवहन और राजमार्ग केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने 7 मई 2017 को पुणे में देश के प्रथम बायोमास से इथेनॉल का उत्पादन करने वाले बायो रिफाइनरी प्लांट का उद्घाटन किया। यह प्लांट महाराष्ट्र के पुणे जिले के राहु गांव में स्थापित किया गया है। नव स्थापित संयंत्र, चावल और गेहूं का पुआल, कपास की डंठल, गन्ना कचरा, बेहतर उत्पाद की पैदावार वाले मकई सीस सहित विभिन्न कृषि अवशेषों को प्रोसेस करके प्रतिवर्ष 10 लाख लीटर इथेनॉल उत्पादन करने में सक्षम है।

बायो रिफाइनरी:

यह एक ऐसी सुविधा है, जो बायोमास से ईंधन, बिजली, गर्मी और मूल्य वर्धित रसायनों का उत्पादन करने के लिए बायोमास रूपांतरण प्रक्रियाओं और उपकरणों को एकीकृत करता है। यह अवधारणा आज की पेट्रोलियम रिफाइनरी के समान है, जो पेट्रोलियम से कई ईंधन और उत्पादों का उत्पादन करता है। जैव-उर्वरक और जैव-कीटनाशकों के उत्पादन में बायोरेफाइनरी के विशिष्ट अनुप्रयोग हैं।

बायो रिफाइनरी का महत्व:

जैव ईंधन (बायोमास से प्राप्त ईंधन) लागत प्रभावी और प्रदूषण मुक्त है।

सबसे आम जैव ईंधन फसलों में मकई, रैपिसीड / कैनोला, गन्ने, पाम तेल, जेट्रोफा, सोयाबीन, कपास बी, सूरजमुखी के बीज, गेहूं, चीनी बीट, कसावा, शैवाल, नारियल, जोओबा और केस्टर बीन्स शामिल हैं।

भारत सहित विश्व स्तर पर कई देशों ने वाहनों से हानिकारक उत्सर्जन को कम करने के लिए इथेनॉल मिश्रण का सहारा लिया है।

रिफाइनरी का उद्घाटन ईथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम में 20 फीसदी की बढ़ोतरी के लिए मार्ग प्रशस्त करता है और कच्चे तेल के आयात के बोझ को कम कर सकता है।