बारमेर-मुनावाब, पिपाड रोड-बिलाड़ा रेल मार्गों को ग्रीन कॉरिडोर घोषित किया गया

उत्तर पश्चिमी रेलवे ने राजस्थान के बाड़मेर-मुनावाब और पीपाड़ रोड-बिलाड़ा रेल मार्गों को ग्रीन कॉरीडोर के रूप में विकसित करने की घोषणा की. इस घोषणा के उपरांत भारतीय रेलवे ग्रीन कॉरिडोर की संख्या 5 हो गई. 114 किलोमीटर लंबा मानददुराई-रामेश्वरम दक्षिण रेलवे कॉरिडोर भारत का प्रथम ग्रीन कॉरिडोर था. जबकि गुजरात के ओखा-कानलुस और पोरबंदर-वसाजिया रेलवे अनुभाग को भी ग्रीन कॉरिडोर में शामिल किया गया है.

ग्रीन कॉरिडोर के मुख्य तथ्य:

‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत’ पहल के तहत पर्यावरण को स्वच्छ करने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत ग्रीन कॉरिडोर रेलवे पटरियों पर शून्य शौचालय का निर्वहन सुनिश्चित करता है।

रेल पटरियों पर मानव कचरे के शून्य निर्वहन को सुनिश्चित करने और पटरियों के क्षरण को रोकने के लिए इस अनुभाग में ट्रेनों को बायो-टॉयलेट से लैस किया गया है।

जैव शौचालय के मुख्य तथ्य:

भारतीय रेलवे ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सहयोग से पर्यावरण के अनुकूल ‘जैव-शौचालय’ विकसित किए थे।

जैव-शौचालयों में एक बायोडिगेस्टर टैंक में निर्वहन होता है, जिसमें एनेरोबिक बैक्टीरिया होता है, जो एक छोटे से टैंक में ट्रेन के कोच के नीचे फिट होता है।

बैक्टीरिया मानव विघटित पदार्थ को जल और छोटे मात्रा में गैसों (मिथेन सहित) में हाइड्रोलिसिस, एसिटोजेनेसिस, एसिमोजेनेसिस और मेथानोजेनेसिस की प्रक्रिया में परिवर्तित करते हैं।

भारतीय रेलवे का लक्ष्य सितंबर 2019 तक स्वच्छ भारत मिशन के हिस्से के रूप में अपने सभी कोचों में मानव अपशिष्ट निर्वहन मुक्त जैव-शौचालय स्थापित करना है।

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