इसरो और लिथियम आयन बैटरी

15 अप्रैल 2017 को केंद्र सरकार ने बिजली के वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए बैटरी प्रौद्योगिकी को साझा करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को निर्देश दिया है। इसरो के अंतर्गत विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने दो-और तीन-पहिया वाहनों में उपयोग के लिए उच्च-शक्ति वाली बैटरी बनाने के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित की है। जिसका भारतीय मोटर वाहन अनुसंधान संघ (एआरएआई) द्वारा सफल परीक्षण किया जा चुका है। इस विकास से भारत के विद्युत वाहनों (ईवी) उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में जल्द ही भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के साथ बैटरी प्रौद्योगिकी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेगा। इस क्रम में कैबिनेट सचिवालय में इसरो द्वारा प्राप्त प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर सक्षम ढांचा विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया।

जरुरत:

बिजली के वाहनों के उत्पादन के लिए बैटरियां मुख्य घटक हैं लेकिन, वर्तमान में लिथियम आयन बैटरी विदेशों से आयात की जाती है जो उन्हें बहुत महंगा बनाती है। लिथियम आयन बैटरी का पारंपरिक बैटरी की तुलना में कम वजन होना और उच्च शक्ति प्रदान करना गुणवत्ता को प्रदर्शित करता है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, ऐसी बैटरी की थोक खरीद और बड़े पैमाने पर उत्पादन लगभग 80% तक कम कर सकता है। यह ऐसी बैटरी की मांग को प्रोत्साहन देगा और भारतीय ग्राहकों की पहुंच के भीतर उनकी कीमतों को बनाए रखेगा। वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार अधिक बिजली के वाहनों के उत्पादन को आगे बढ़ाने का प्रयास करती है, जो हाल के दिनों में सबसे बड़ी स्वास्थ्य चिंताओं में से एक बन गई है।