एसबीआई के विलय संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य

15 फरवरी 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय समिति ने भारतीय स्टेट बैंक में उसके 5 सहायक बैंकों विलय संबंधी प्रस्ताव को सहमति जारी कर दी। यह 5 सहायक बैंक है: बीकानेर एंड जयपुर स्टेट बैंक, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम -1959 में संशोधन हेतु इसे संसदीय पटल पर प्रस्तुत करने संबंधित आदेश को भी सहमति जारी की।

भारतीय स्टेट बैंक विलय संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य:

भारतीय स्टेट बैंक, “स्टेट बैंक अधिनियम 1955 की धारा 35” के तहत अपने 5 सहायक बैंकों को विलय करने में सक्षम है। भारतीय स्टेट बैंक की यह विलय प्रक्रिया सहायक बैंकों की भौगोलिक एकाग्रता जोखिम संबंधित असुरक्षा को कम करने में भी सहायक होगा।

यह विलय भारतीय अर्थव्यवस्था की सरकारी बैंकिंग प्रक्रिया में जोखिम प्रबंधन और एकीकृत ट्रेजरी परिचालन को बड़े पैमाने पर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस प्रक्रिया स्वरूप सहयोगी बैंकों के मौजूदा ग्राहक भी भारतीय स्टेट बैंक के वैश्विक नेटवर्क की सेवाओं का लाभ उठा पाएंगे।

यह विलय प्रक्रिया केंद्रीकृत निगरानी व्यवस्था के माध्यम से उच्च मूल्य क्रेडिट जोखिम के बेहतर प्रबंधन में सहायक होगी, साथ ही अलग-अलग बैंकिंग नकदी प्रवाह की निगरानी से भी छूट दिलाएगी।

भारतीय स्टेट बैंक की विलय प्रक्रिया, बैंकिंग व्यवस्था परिचालन में सुधार लाकर अपने प्रथम वर्ष में एक हजार करोड़ों रुपए की अनुमानित आय प्राप्त करेगी।

इंद्रधनुष 2.0 और विलय प्रक्रिया

वर्ष 2017 में केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों हेतु व्यापक पुनर्पूंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ करने जा रही है। इंद्रधनुष 2.0 नामक इस योजना का मुख्य उद्देश्य गैर निष्पादित परिसंपत्तियों के रूप में शीर्ष दोषी खाता धारकों की पहचान करना है।
इस योजना के माध्यम से वर्तमान एसेट क्वालिटी की समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट को निष्पक्ष और वैश्विक पूंजी पर्याप्त नियम BASEL-III के तहत बनाना है।

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