केंद्र सरकार द्वारा मध्यस्थता प्रणाली की समीक्षा हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन

केंद्रीय कानून मंत्रालय ने देश में मध्यस्थता तंत्र को प्रभावशाली बनाने के क्रम में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया है। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी एन श्रीकृष्ण के नेतृत्व वाली यह 10 सदस्यीय समिति वर्तमान मध्यस्थता तंत्र की समीक्षा कर देश में एक नए प्रभावी संस्थागत मध्यस्थता तंत्र का ढांचा बनाने पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट 90 दिनों के भीतर कानून मंत्रालय को प्रस्तुत करेगी।

पंचाट और सुलह संशोधन अधिनियम- 2015 (The Arbitration and Conciliation (Amendment) Act, 2015) का प्रमुख उद्देश्य मौद्रिक दावों के आसान वसूली परिकल्पना को वास्तविक बनाते हुए अदालतों में वाणिज्यिक मामलों में कमी लाना है। जिसमें मध्यस्थता के माध्यम से विवाद समाधान की प्रक्रिया को तेज किया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

देश में मध्यस्थता कानून में सुधार लाने, अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से हल करने सहित महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं को मध्यस्थता तंत्र के माध्यम से हल करने की सिफारिशें इस समिति द्वारा प्रस्तुत की जाएगी।

हमें ध्यान देना चाहिए कि वर्ष 2016 में विश्व बैंक की व्यापार रैंकिंग (Easy of doing business) में भारत को 190 देशों में 130 वा स्थान दिया गया। देश में मध्यस्थता कानून में सुधार लाकर केंद्र सरकार वाणिज्यिक विवादों के निपटारे को सरल बनाने का प्रयत्न कर रही है, जो देश में व्यापार सुविधा में इजाफा कर भारत को उद्योग जगत के लिए एक सुगम और आकर्षक केंद्र बना सके।

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