नर्मदा सेवा मिशन

16 मई 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए नर्मदा सेवा मिशन की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की संख्या का अनावरण भी किया, जिसका निर्माण विभिन्न हितधारकों के व्यापक परामर्श के बाद किया गया है जिसमें पर्यावरणविदों सहित अन्य अन्य क्षेत्र के नदी संरक्षण विशेषज्ञ शामिल किए गए। यह आयोजन मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में आयोजित किया गया था। इस समारोह में प्रधानमंत्री ने ‘नमामी देवी नर्मदे सेवा यात्रा‘ का समापन भी किया।

नमामी देवी नर्मदे सेवा यात्रा:

11 दिसंबर 2016 को अमरर्कतक से नमामी देवी नर्मदे सेवा यात्रा की शुरुआत की गई थी। अमरर्कतक नर्मदा नदी की उत्पत्ति स्थल है। इस यात्रा के तहत कुल 3,344 किलोमीटर की दूरी तय की गई। जिसमें 1,100 से अधिक गांवों और कस्बों से यात्रा को गुजारा किया। 15 मई 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनूपपुर जिले के अमरकंटक में नमामी देवी नर्मदे सेवा यात्रा की समाप्ति की आहुति दी। हमें ध्यान देना चाहिए कि नमामी देवी नर्मदे सेवा यात्रा को विश्व के सबसे बड़े नदी संरक्षण अभियान में से एक माना जा रहा है।

नर्मदा नदी:

नर्मदा नदी माइकल पहाड़ियों से निकलती है जो कुल 1312 किलोमीटर की दूरी तय करके खंभात की खाड़ी से अरब सागर में मिलती है।नर्मदा, ताप्ती और माही देश की केवल तीन प्रमुख नदियों हैं जो पूर्व से पश्चिम तक बहती हैं। नदी लगभग 17 लाख हेक्टेयर भूमि तक सिंचाई के स्रोत के रूप में काम करती है और चार करोड़ से ज्यादा लोगों को पेयजल प्रदान करती है। यह नदी जल विद्युत स्रोतों से कुल 2,400 मेगावाट विद्युत उत्पादन करने का प्रमुख स्रोत भी है। मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने 2016-17 के बजट अनुमान के अनुसार नर्मदा घाटी विकास के लिए 209 .31 करोड रूपये आवंटित किए हैं। राज्य में 700 नर्मदा सेवा समितियों और 74,000 से अधिक नर्मदा सेवक नदी की रक्षा के लिए पंजीकृत हैं।

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