बैंक नोट्स (देनदारियों समाप्ति) अधिनियम, 2017

1 मार्च 2017 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बैंक नोट्स (देनदारियों समाप्ति) अधिनियम, 2017 को अपनी सहमति दे दी। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की सहमति के उपरांत इस कानून के तहत एक निश्चित संख्या से अधिक 500 रु और 1000 रु के पुराने नोट रखना एक अपराध की श्रेणी में आएगा।

बैंक नोट्स (देनदारियों समाप्ति) अधिनियम, 2017 के महत्वपूर्ण तथ्य:

नए कानून के तहत यदि किसी व्यक्ति के पास 10 से अधिक और अध्ययन, अनुसंधान या मुद्राशास्त्र उद्देश्यों के लिए 25 से अधिक 500 रु और 1000 रु के पुराने नोट पाए जाने पर, संबंधित व्यक्ति से ₹10000 या प्राप्त नकदी की 5 गुना धनराशि जुर्माने के तहत वसूली जाएगी।

नए कानून के तहत यदि भारतीय नागरिक विमुद्रीकरण के समय (9 नवंबर- 31 दिसंबर, 2016) अपनी झूठी उपस्थिति विदेश में घोषित करते हुए पकड़ा गया तो न्यूनतम ₹50000 का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है।

नया कानून विमुद्रीकरण प्रक्रिया के उपरांत भारतीय रिजर्व बैंक की पुराने 500 और 1000 रुपए की अदायगी संबंधी घोषणा को भी प्रभावी रूप से समाप्त करता है।

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इंद्रधनुष 2.0: केंद्रीय पुनर्पूंजीकरण योजना

वर्ष 2017 में केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों हेतु व्यापक पुनर्पूंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ करने जा रही हैं.  “इंद्रधनुष 2.0” नामक इस योजना का मुख्य उद्देश्य गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के रूप में कुछ शीर्ष दोषी खाताधारकों की पहचान करते हुए पर्याप्त प्रावधान बनाना है.

इंद्रधनुष 2.0 महत्वपूर्ण तथ्य:

वर्ष 2017 में “इंद्रधनुष 2.0” के एसेट क्वालिटी की समीक्षा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाएगी.  केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट को निष्पक्ष और वैश्विक पूंजी पर्याप्तता नियम BASEL-III के तहत बनाना है.

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिसंबर 2015 में एसेट क्वालिटी समीक्षा प्रारंभ की गई थी, जिसे मार्च 2017 में समय बंद कार्यक्रम के तहत पूर्ण किया जाएगा.

केंद्र सरकार द्वारा ‘इंद्रधनुष’ कार्यक्रम की घोषणा वर्ष 2015 में सरकारी बैंको के 70,000 करोड़ रुपये की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के प्रेरणा स्वरुप लिया गया था.

वर्तमान समय में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वैश्विक जोखिम मापदंड BASEL-III के लिए आवश्यक 1.1 लाख करोड़ रुपए जुटाने की अनुमति प्रदान की गई है.

BASEL-III महत्वपूर्ण तथ्य:

BASEL-III बैंक पूंजी पर्याप्तता, बाजार में तरलता जोखिम और तनाव परीक्षण पर एक वैश्विक, स्वैच्छिक नियामक ढांचा है। यह वैश्विक जोखिम मापदंड वर्ष 2010-11 की बैंकिंग पर्यवेक्षण बासेल/BASEL समिति की सिफारिशों पर सहमति व्यक्त करती है.

यह मापदंड बैंक में जमा राशि व उधारी के विभिन्न रूपों के लिए भंडार के भिन्न स्तरों की जरूरतों पर आधारित है.

मार्च 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 31 मार्च 2019 तक BASEL-III (अंतरराष्ट्रीय मापदंड) के अनुसार अपनी सेवाएं देने के लिए दिशा निर्देश दिए.

BASEL-III से पूर्व व्यापक पुनर्पूंजीकरण प्रक्रिया हेतु BASEL-I और BASEL-II अंतर्राष्ट्रीय मानकों की पालना की जाती थी.

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