इंद्रधनुष 2.0: केंद्रीय पुनर्पूंजीकरण योजना

वर्ष 2017 में केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों हेतु व्यापक पुनर्पूंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ करने जा रही हैं.  “इंद्रधनुष 2.0” नामक इस योजना का मुख्य उद्देश्य गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के रूप में कुछ शीर्ष दोषी खाताधारकों की पहचान करते हुए पर्याप्त प्रावधान बनाना है.

इंद्रधनुष 2.0 महत्वपूर्ण तथ्य:

वर्ष 2017 में “इंद्रधनुष 2.0” के एसेट क्वालिटी की समीक्षा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाएगी.  केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट को निष्पक्ष और वैश्विक पूंजी पर्याप्तता नियम BASEL-III के तहत बनाना है.

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिसंबर 2015 में एसेट क्वालिटी समीक्षा प्रारंभ की गई थी, जिसे मार्च 2017 में समय बंद कार्यक्रम के तहत पूर्ण किया जाएगा.

केंद्र सरकार द्वारा ‘इंद्रधनुष’ कार्यक्रम की घोषणा वर्ष 2015 में सरकारी बैंको के 70,000 करोड़ रुपये की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के प्रेरणा स्वरुप लिया गया था.

वर्तमान समय में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वैश्विक जोखिम मापदंड BASEL-III के लिए आवश्यक 1.1 लाख करोड़ रुपए जुटाने की अनुमति प्रदान की गई है.

BASEL-III महत्वपूर्ण तथ्य:

BASEL-III बैंक पूंजी पर्याप्तता, बाजार में तरलता जोखिम और तनाव परीक्षण पर एक वैश्विक, स्वैच्छिक नियामक ढांचा है। यह वैश्विक जोखिम मापदंड वर्ष 2010-11 की बैंकिंग पर्यवेक्षण बासेल/BASEL समिति की सिफारिशों पर सहमति व्यक्त करती है.

यह मापदंड बैंक में जमा राशि व उधारी के विभिन्न रूपों के लिए भंडार के भिन्न स्तरों की जरूरतों पर आधारित है.

मार्च 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 31 मार्च 2019 तक BASEL-III (अंतरराष्ट्रीय मापदंड) के अनुसार अपनी सेवाएं देने के लिए दिशा निर्देश दिए.

BASEL-III से पूर्व व्यापक पुनर्पूंजीकरण प्रक्रिया हेतु BASEL-I और BASEL-II अंतर्राष्ट्रीय मानकों की पालना की जाती थी.

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