राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम: महत्वपूर्ण तथ्य

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने “राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम/Rashtriya Kishor Swasthya Karyakram” के तहत किशोरों के लिए “SAATHIYA/साथिया संसाधन किट” और “SAATHIYA/साथिया सलाह” मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारंभ किया. राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत “साथिया” स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को बढ़ाने और उच्च उम्र ज्ञान प्रदान करने संबंधी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दों पर अपनी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं.

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम

7 जनवरी 2014 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश के किशोरों को स्वास्थ्य एवं परिवार विकास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के लिए “राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम” शुरू किया गया.

इस योजना के तहत सहकर्मी शिक्षक सामाजिक प्रक्रिया के अनुरूप योजना संबंधी जानकारी किशोरों को उपलब्ध कराएंगे.

यह योजना केंद्रीय और संबंधित राज्य सरकार मंत्रालय के आपसी सहयोग का एक बेहतर उदाहरण है.

यह योजना मुख्यतः 6 प्राथमिकताओं पर ध्यान आकर्षण करती है: (i) पोषण, (ii) यौन और प्रजनन स्वास्थ्य (SRH), (iii) गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी), (iv) पदार्थ दुरुपयोग, (v) चोटों और हिंसा (लिंग सहित आधारित हिंसा) और (vi) मानसिक स्वास्थ्य।

इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के सहयोग से एक “राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य रणनीति” विकसित की है.

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य रणनीति के तहत 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के शहरी और ग्रामीण, विवाहित और अविवाहित, पुरुष और महिलाओं को शामिल किया गया है.

Saathiya/साथिया संसाधन किट को संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष और भारतीय जनसंख्या फाउंडेशन द्वारा विकसित किया गया है.

Saathiya/साथिया संसाधन किट के तहत एक्टिविटी बुक, शिक्षक डायरी, और प्रश्न उत्तर पुस्तिकाएं वितरित की जाएगी.

यह किट जमीनी और ग्राम स्तर पर एक संवाद के माध्यम से किशोरों को स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन की गई है.

साथिया सलाह मोबाइल एप्लीकेशन किशोरों को Android मोबाइल के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रारंभ किया गया है. यह मोबाइल एप्लीकेशन एक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर और एक ई-परामर्शदाता के रूप में भी अपनी सुविधाएं प्रदान करेगा.

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रोटावायरस वैक्सीन: विस्तार योजना

केंद्र सरकार ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं संबंधी सुविधाओं में सुधार लाने के क्रम में कुछ स्वास्थ्य योजनाओं के विस्तार की घोषणा की। केंद्र सरकार ने अपने सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 5 अतिरिक्त राज्यों में रोटावायरस/डायरिया वैक्सीन के विस्तार के प्रस्ताव को सहमति जारी की।

वर्तमान समय में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में यह वैक्सीन कार्यक्रम अपने प्रथम चरण के तहत पेश किया गया था। जिसके तहत लगभग 38 लाख बच्चों को टीकाकरण कार्यक्रम से लाभप्रद किया। रोटावायरस वैक्सीन कार्यक्रम के तहत संबंधित चार राज्यों में दस्त की वजह से भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या में 40% कटौती पाई गई।

डायरिया रोग:

डायरिया भारत में बाल मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण है। यह रोग रोटावायरस के कारण 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होता है। जिसके प्रभाव स्वरूप बच्चों में गंभीर दस्त की शिकायत और कमजोरी आ जाती है। यह वायरस भारत में लगभग 78,000 बाल मृत्यु दर के लिए पूर्णता उत्तरदाई है।

रोटावायरस के संक्रमण के साथ बच्चे को बुखार, उल्टी और अक्सर पेट में ऐठन और दस्तों की शिकायत होती है।

रोटावायरस के संक्रमण के उपरांत की दस्तों के उपरांत बच्चों में निर्जलीकरण की शिकायत हो जाती है।

रोटावायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, जो श्वसन मार्ग, दूषित हाथों और मल-मौखिक मार्ग द्वारा फैलता है।

टीकाकरण के महत्वपूर्ण तथ्य:

सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम वर्ष 1985 में भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया था। इस टीकाकरण कार्यक्रम को वर्ष 1992 में बाल जीवन रक्षा और सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम का एक हिस्सा बना लिया गया था। वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत इसे क्रियान्वित किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के तहत 10 प्रमुख रोगों का टीकाकरण किया जाता है। यह है: टीबी, डिप्थीरिया, काली खांसी (काली खांसी), टिटनेस, पोलियो, खसरा, हेपेटाइटिस बी, डायरिया, जापानी इंसेफेलाइटिस और निमोनिया

वर्ष 2007 में हेपेटाइटिस बी को इस टीकाकरण कार्यक्रम से जोड़ा गया था।

वर्ष 2014 में चार प्रमुख टीके रोटावायरस, रूबेला, जापानी इंसेफलाइटिस और पोलियो वैक्सीन को इस टीकाकरण कार्यक्रम से जोड़ा गया था।

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