विश्व बैंक ने राष्ट्रीय जलमार्ग 1 के लिए $ 375 मिलियन ऋण स्वीकृत किया

22 अप्रैल 2017 को विश्व बैंक ने पश्चिम बंगाल के हल्दिया और उत्तर प्रदेश में वाराणसी के बीच जल मार्ग विकास परियोजना के तहत गंगा नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग -1 (एनडब्ल्यू -1) की क्षमता में वृद्धि के लिए 375 मिलियन डॉलर (लगभग 2,421 करोड़ रुपये) के ऋण को मंजूरी दी है। यह परियोजना 1,390 किलोमीटर लंबे जल मार्ग विकास के साथ 1,500-2,000 क्षमता वाले जहाजों के व्यावसायिक नेविगेशन को सक्षम करेगी।

इस परियोजना के तहत भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने एनडब्ल्यू -1 पर नदी सूचना सेवा प्रणाली स्थापित की है, जो भारत में अपनी तरह के प्रथम सेवा है। इसके अलावा, तीन बहु-मोडल टर्मिनल, वाराणसी, साहिबगंज (झारखंड), हल्दिया में एक-एक और कालुघट और गाजीपुर में अंतर-मोडल टर्मिनल, फ़ारक्का में एक नेविगेशन लॉक, और पांच रोल ऑन-रोल ऑफ (आरओ-आरओ) टर्मिनलों का निर्माण किया जाएगा।

यह परियोजना भारत में पहली बार राष्ट्रीय जलमार्ग -1 पर नदी सूचना सेवा प्रणाली की स्थापना करेगी। नदी सूचना प्रणाली (आरआईएस) अंतर्देशीय नेविगेशन में यातायात और परिवहन प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने के लिए डिजाइन किए गए उपकरण, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) संबंधित सेवाएं हैं।

जल मार्ग विकास परियोजना के मुख्य तथ्य

जल मार्ग विकास परियोजना गंगा नदी पर एक परियोजना है जिसमें इलाहाबाद और हल्दिया के बीच जलमार्ग के विकास की परिकल्पना है, जो कि 1620 किमी की दूरी को कवर करेगी। इसका लक्ष्य नदी पर कम से कम 1500 टन के जहाजों के व्यावसायिक नेविगेशन को सक्षम करने के लिए तीन मीटर की गहराई के साथ एक उचित रास्ता विकसित करना है। इस परियोजना के अंतर्गत, मल्टी-मोडल टर्मिनलों का विकास, खुली नदी नेविगेशन तकनीक, संरक्षण कार्य, आधुनिक नदी सूचना प्रणाली (आरआईएस) इत्यादि को विकसित किया जाएगा।

राष्ट्रीय जलमार्ग -1:

राष्ट्रीय जलमार्ग -1 उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मध्य एक जल मार्ग है, जो संभवत गंगा नदी बेसिन के निकट स्थित प्रमुख शहरों हल्दिया, हावड़ा, कोलकाता, भागलपुर, पटना, गाजीपुर, वाराणसी, इलाहाबाद को जलमार्ग से जुड़ेगा।

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण:

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) भारत में जलमार्ग के प्रभारी वैधानिक निकाय है। इसका मुख्यालय नोएडा, उत्तर प्रदेश में स्थित है। इसका मुख्य कार्य अंतर्देशीय जलमार्गों में आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना, नई परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता का सर्वेक्षण करना और प्रशासन और विनियमन जारी करना है।

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