VIP कारों पर लाल बीकन के प्रतिबंध संबंधी आदेश

19 अप्रैल 2017 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के क्रम में VIP कारों के ऊपर लाल बीकनो के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति जारी की। प्रस्ताव के अनुसार तीन श्रेणियों को प्रतिबंध से छूट दी गई है यह श्रेणियां है: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश। यह छूट आपातकालीन सेवा वाहनों उदाहरणार्थ अग्निशमन दल, एंबुलेंस सेवा, पुलिस वाहन व अन्य आपातकालीन सेवाओं को नीले बीकन का उपयोग की अनुमति देती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल का यह फैसला 1 मई 2017 से प्रभावित होगा जिसके अनुसार प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्य कैबिनेट मंत्रियों, नौकरशाहों और उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों लाल बीकन का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

वर्तमान समय में केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा निर्दिष्ट उच्च मान्यताओं के वाहनों को VIP कारों के ऊपर लाल बीकनो की अनुमति प्राप्त है। हमें ध्यान देना चाहिए कि वर्ष 2005 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार , निम्नलिखित गणमान्य व्यक्ति फ्लेशर के साथ लाल बत्ती का इस्तेमाल करने के लिए पात्र थे। वे राष्ट्रपति, उपाध्यक्ष, प्रधान मंत्री, पूर्व राष्ट्रपति, उप प्रधान मंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा के अध्यक्ष, संघ के कैबिनेट मंत्रियों, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधान मंत्री, विपक्ष के नेता राज्यसभा और लोक सभा, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश है।

वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लाल बीकन के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए मोटर वाहन नियमों में संशोधन करने का निर्देशित किया था, जिसके अनुसार केवल संवैधानिक अधिकारियों को लाल बीकन का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए। कैबिनेट का निर्णय 2001 में संसद पर हमले के बाद के महत्व को मानता है। हमले के दौरान आतंकवादियों ने एक लाल बीकन के साथ लगे वाहन के माध्यम से संसद परिसर में प्रवेश किया। इस निर्णय के साथ, यातायात अधिकारियों के लिए उल्लंघनकर्ताओं को अवैध रूप से लाल बीकन का इस्तेमाल करने और 2001 की घटनाओं को दोहराने से रोकने के लिए आसान होगा। हाल ही में उत्तर प्रदेश और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने अपनी आधिकारिक कारों पर लाल बीकन का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया।

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असम में दो से अधिक बच्चों पर नए सेवा नियम

11 अप्रैल 2017 को असम सरकार ने जनसंख्या संबंधी नई मसौदा नीति जारी की।

पॉलिसी की मुख्य विशेषताएं:

इस पॉलिसी के तहत 2 से अधिक बच्चों वाले नागरिकों को सरकारी नौकरी से वंचित रखा जाएगा। साथ ही वर्तमान स्थिति में दो से अधिक बच्चों वाले कार्मिकों को उनकी सेवा समाप्ति तक बच्चों की संख्या न बढ़ाने संबंधित प्रपत्र कार्यालय में जमा कराना होगा।

पॉलिसी के तहत ट्रैक्टरों, घरों और अन्य सरकारी लाभ, जिनमें रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना शामिल है, दो बच्चों वाले आदर्श परिवार पर ही लागू होगी।

इसके अतिरिक्त राज्य चुनाव आयोग के तहत आयोजित सभी चुनाव जैसे पंचायत नगर निकाय और स्वायत्त परिषद में भी उम्मीदवारों को पॉलिसी की पालना सुनिश्चित करनी होगी।

इस नीति का उद्देश्य सभी लड़कियों के लिए विश्वविद्यालय स्तर तक की शिक्षा को मुक्त करना है, जिसमें हॉस्टल की फीस, परिवहन, किताबें और संबंधित अन्य खर्च शामिल है।

यह पॉलिसी शादी की कानूनी उम्र (18 लड़कियों और 21 लड़कों) को बढ़ाने संबंधी बहस की परिकल्पना करता है, साथ ही यदि कोई बाल विवाह होता है तो वह सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य होगा।

यह पॉलिसी राज्य में राज्य जनसंख्या परिषद और राज्य जनसंख्या अनुसंधान केंद्र स्थापित करना भी प्रस्तावित करता है।

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