राष्ट्रीय नो-फ्लाई सूची: मुख्य तथ्य

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू एयरलाइंस को सशक्त बनाने और हुल्लड़बाज यात्रियों पर शिकंजा कसने के क्रम में “राष्ट्रीय नो-फ्लाई सूची” संबंधित प्रस्ताव जारी किया. विश्व में अपनी तरह के इस प्रथम प्रस्ताव में एयरलाइंस एक व्यक्ति को अपराधिक प्रकृति के आधार पर 3 महीने से 2 साल तक “राष्ट्रीय नो-फ्लाई सूची” में डाल सकती है.

मंत्रालय ने यात्रियों को अवरोधों के आधार पर तीन स्तरों में वर्गीकृत किया है.

स्तर 1 भौतिक इशारों जैसे विघटनकारी व्यवहार के लिए है।
स्तर 2 शारीरिक रूप से अपमानजनक व्यवहार जैसे धकेलना, लात मारना, और यौन उत्पीड़न के लिए है।
स्तर 3 विमानन कंपनी को नुकसान संबंधित धमकी देने जैसा व्यवहार।

मुख्य तथ्य:

स्तर 1 के अपराध के लिए, एक यात्री को तीन महीने के लिए, जबकि स्तर 2 और स्तर 3 के अपराध के लिए, उसे क्रमशः छह महीने और दो साल के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस भी, यदि वे चाहें तो इन दिशानिर्देशों का उपयोग कर सकते हैं.
एयरलाइंस एक यात्री को तुरंत उड़ान से रोक सकती है, लेकिन वह यात्री “राष्ट्रीय नो-फ्लाई सूची” पर तुरंत नहीं आएगा।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 2014:

हाल ही में इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भारत सरकार से एयरलाइंस और यात्रियों की सुरक्षा संबंधी मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 2014 को मंजूरी देने संबंधी आग्रह किया है. इसी क्रम में इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने वर्ष 2009 में अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन को टोक्यो कन्वेंशन की समीक्षा और औपचारिक अनुरोध को स्वीकार करने संबंधी आग्रह भी किया था, जिसमें हुल्लड़बाज यात्रियों का मुद्दा भी प्रमुख है.

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VIP कारों पर लाल बीकन के प्रतिबंध संबंधी आदेश

19 अप्रैल 2017 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के क्रम में VIP कारों के ऊपर लाल बीकनो के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति जारी की। प्रस्ताव के अनुसार तीन श्रेणियों को प्रतिबंध से छूट दी गई है यह श्रेणियां है: राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश। यह छूट आपातकालीन सेवा वाहनों उदाहरणार्थ अग्निशमन दल, एंबुलेंस सेवा, पुलिस वाहन व अन्य आपातकालीन सेवाओं को नीले बीकन का उपयोग की अनुमति देती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल का यह फैसला 1 मई 2017 से प्रभावित होगा जिसके अनुसार प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्य कैबिनेट मंत्रियों, नौकरशाहों और उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों लाल बीकन का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

वर्तमान समय में केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा निर्दिष्ट उच्च मान्यताओं के वाहनों को VIP कारों के ऊपर लाल बीकनो की अनुमति प्राप्त है। हमें ध्यान देना चाहिए कि वर्ष 2005 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार , निम्नलिखित गणमान्य व्यक्ति फ्लेशर के साथ लाल बत्ती का इस्तेमाल करने के लिए पात्र थे। वे राष्ट्रपति, उपाध्यक्ष, प्रधान मंत्री, पूर्व राष्ट्रपति, उप प्रधान मंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा के अध्यक्ष, संघ के कैबिनेट मंत्रियों, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधान मंत्री, विपक्ष के नेता राज्यसभा और लोक सभा, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश है।

वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लाल बीकन के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए मोटर वाहन नियमों में संशोधन करने का निर्देशित किया था, जिसके अनुसार केवल संवैधानिक अधिकारियों को लाल बीकन का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए। कैबिनेट का निर्णय 2001 में संसद पर हमले के बाद के महत्व को मानता है। हमले के दौरान आतंकवादियों ने एक लाल बीकन के साथ लगे वाहन के माध्यम से संसद परिसर में प्रवेश किया। इस निर्णय के साथ, यातायात अधिकारियों के लिए उल्लंघनकर्ताओं को अवैध रूप से लाल बीकन का इस्तेमाल करने और 2001 की घटनाओं को दोहराने से रोकने के लिए आसान होगा। हाल ही में उत्तर प्रदेश और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने अपनी आधिकारिक कारों पर लाल बीकन का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया।

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