प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: मुख्य तथ्य

14 अप्रैल 2017 को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत वितरित ऋण राशि कुल 1,80,000 करोड़ों रूपए के आंकड़े को पार कर गई।

मुख्य तथ्य:

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत आवंटित ऋण में से 1,23,000 करोड़ रुपये बैंकों द्वारा, जबकि 57,000 करोड़ों रुपए गैर बैंकिंग संस्थाओं द्वारा बांटे गए।
अभी तक संकलित आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष उधारकर्ताओं की संख्या 4 करोड़ से अधिक थी, जिसमें से 70% महिला उधारकर्ता शामिल है। उधारकर्ताओं का जातिगत आधार पर प्रतिशत: 20% अनुसूचित जाति वर्ग, 5% अनुसूचित जनजाति वर्ग, जबकि 35% अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के मुख्य तथ्य:

यह योजना अप्रैल 2015 में प्रारंभ की गई।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य को उधारदाताओं द्वारा दिए गए ऋणों से छोटे ऋण लेने वाले उधारदाताओं को जमानत रहित ऋण पुनर्वित्त करना है।
इस योजना को कुल 20,000 करोड रूपए का धन आवंटित किया गया. जिसमें से छोटे उद्यमियों को ₹50000 से 10 लाख के बीच प्रदान किया जाता है।
इस योजना के तहत बैंक और माइक्रो फाइनेंस इंस्टिट्यूट भारतीय रिजर्व बैंक से पूंजी प्राप्त कर ऋण उपलब्ध करा सकते हैं।
इस योजना के तहत डेयरी, कुक्कुट, मधुमक्खी पालन आदि जैसे कृषि के लिए संबद्ध गतिविधियों के लिए एक लाख से 10 लाख रुपए के बीच ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
इस योजना की अनूठी विशेषताओं में एक मुद्रा कार्ड शामिल है जो एटीएम और कार्ड मशीनों के माध्यम से कार्यशील पूंजी तक पहुंच की अनुमति देता है।

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केंद्र सरकार और बैंकों की टर्नअराउंड योजना

25 मार्च 2017 को केंद्र सरकार ने बैंकिंग परिसंपत्ति गुणवत्ता की व्यवस्था को सुधारने के क्रम में 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निर्देशित किया है। इन निर्देशों के तहत बैंक अपने उधारदाताओं को अधिक पूंजी निवेश तभी प्रदान करेगा, जब उधारदाता अपने उधार उतारने संबंधी योजना (टर्नअराउंड योजना) समय-समय पर बैंक के साथ साझा करेगा। हमें ध्यान देना चाहिए कि हाल ही में कुछ बैंकों ने वित्त वर्ष 2015-16 में घाटे का मुख्य कारण बैंकिंग परिसंपत्ति के खराब होने को माना है, इसी क्रम में केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा रिपोर्ट के तहत बैंकों को बैंकिंग नियामक द्वारा पहचान किए गए कई खातों को बुरे खाते की श्रेणी में वर्गीकृत करने संबंधी आदेश जारी किए।

भारतीय रिजर्व बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा रिपोर्ट के तहत निकट भविष्य में बैंकों को अपनी बैलेंस शीट को अधिक स्पष्ट और कम क्रेडिट व्यवस्था ( मिशन इंद्रधनुष 2.0: अधिक पढ़ें) का समर्थन करने के लिए तैयार रहने पर भी जोर दिया गया है। भारतीय रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों की सकल गैर निष्पादित संपत्ति सितंबर 2016 तक सकल अग्रिमों की 9.1% तक बढ़ी, जो कि एक साल पहले की तुलना में 5.1% थी।

25 मार्च 2017 को केंद्र सरकार ने राज्य स्वामित्व वाले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मर्चेंट बैंकिंग शाखा “एसबीआई कैप्स” को केंद्र सरकार के साथ अपने उधारदाताओं के टर्नअराउंड योजना संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के आदेश जारी किए गए। केंद्र सरकार अग्रिम 3 वर्षों में देश के सभी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के निजी बैंकों को केंद्र सरकार के साथ अपने उधारदाताओं के टर्नअराउंड योजना में शामिल करने की योजना बना रही है।

इंद्रधनुष 2.0 महत्वपूर्ण तथ्य:

वर्ष 2017 में “इंद्रधनुष 2.0” के एसेट क्वालिटी की समीक्षा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाएगी। केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट को निष्पक्ष और वैश्विक पूंजी पर्याप्तता नियम BASEL-III के तहत बनाना है.

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विशाखापट्टनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारा

सितंबर 2016 में भारत ने एशियाई विकास बैंक के साथ औद्योगिक गलियारे के 2,500 किलोमीटर लंबे क्षेत्र के विकास हेतु कुल 631 मिलियन डॉलर संधि की थी। इस समझौते के तहत 26 फरवरी 2017 को भारत और एशियाई विकास बैंक ने विशाखापट्टनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारे/East Coast Economic Corridor (ECEC) के 800 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को विकसित करने के लिए 375 मिलियन डॉलर संधि पर हस्ताक्षर समझौता किए। इस संधि के तहत एशियाई विकास बैंक, औद्योगिक गलियारे के साथ चार मुख्य केंद्र विशाखापट्टनम, काकीनाडा, अमरावती और श्रीकालहस्ती के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के निर्माण की सुविधा हेतु आर्थिक मदद करेगा।

इस संधि के तहत प्रथम किस्त के तौर पर कुल 245 मिलियन डॉलर दो मुख्य केंद्र विशाखापट्टनम और श्रीकालहस्ती को विकसित करने हेतु प्रदान किया गया है। यह संधि औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने हेतु औद्योगिक और क्षेत्रीय नीतियों का समर्थन करने और व्यापार कर को आसान बनाने में सहायक होगी।

विशाखापट्टनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारा:

ECEC पूर्वी तट के साथ भारत का प्रथम तटीय आर्थिक गलियारा होगा। यह कोलकाता, पश्चिमी बंगाल से कन्याकुमारी, तमिलनाडु तक लगभग 2,500 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा होगा।

यह गलियारा पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के वैश्विक मूल्य श्रंखला के साथ भारत को जोड़ने का मुख्य कार्य करेगा। साथ ही यह भारत की लंबी पूर्वी समुद्री तट और रणनीतिक बंदरगाहों को अंतराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के साथ जोड़ने का भी कार्य करेगा।

यह गलियारा केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना “Make in India” को आगे बढ़ाने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने में भी सहायक होगा।

यह गलियारा पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क के साथ घरेलू कंपनियों को जोड़ने और बंदरगाह औद्योगिकीकरण को भी बढ़ावा देगा। जनवरी 2016 में केंद्र सरकार ने बंदरगाह औद्योगिकीकरण हेतु सागरमला/SAGARMALA नामक एक केंद्रीय इकाई का गठन किया है।

एशियाई विकास बैंक:

19 दिसंबर 1966 को एक क्षेत्रीय विकास बैंक के रूप में एशियाई विकास बैंक की स्थापना की गई।

जिसका मुख्यालय मनीला, फिलिपिंस में स्थित है।

एशियाई विकास बैंक के कुल 67 सदस्य देश है, जिसमें से 48 एशिया और 19 एशिया के बाहरी देश हैं।

एशियाई विकास बैंक में वर्ष 2014 तक जापान कुल 15.7% के साथ सबसे बड़ा शेयर धारक देश है।

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