भारत क्यूआर कोड: डिजिटल भुगतान तकनीक

23 जनवरी 2017 को केंद्र सरकार ने कार्ड स्वाइप मशीन के बिना डिजिटल भुगतान को ओर अधिक आसान और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। केंद्र सरकार ने “भारत क्यूआर कोड” नामक एक नई त्वरित प्रक्रिया (मूल्यांकन) कोड सेवा का शुभारंभ किया. भारत क्यूआर कोड अपनी तरह का दुनिया का पहला इंटर प्रचलित भुगतान स्वीकृति सेवा है। इंटर प्रचलित भुगतान स्वीकृति सेवा से तात्पर्य एक ऐसी डिजिटल सेवा, जिसमें अलग-अलग सेवा प्रदाता अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। इस केंद्रीय परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश में डिजिटल भुगतान को अधिक प्रभावी बनाना है।

भारत क्यूआर कोड

भारत क्यूआर कोड, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से निर्देश के तहत भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), वीसा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।

भारत क्यूआर कोड मास्टर कार्ड / वीजा / रुपे प्लेटफार्मों के लिए एक समन्वय इंटरफ़ेस प्रदान करता है।

भारत क्यूआर कोड आधार सक्षम भुगतान और एकीकृत भुगतान इंटरफेस जैसी सुविधाएं भी प्रदान करता है।

भारत क्यूआर कोड ग्राहक को बिना कार्ड स्वाइप मशीन के खुदरा विक्रेता की आईडी या नंबर पर डिजिटल भुगतान की सेवा प्रदान करता है।

वर्तमान समय में व्यापारी को अलग-अलग सेवाओं के तहत अलग-अलग क्यूआर कोड प्रदर्शित करने होते हैं, किंतु भारत क्यूआर कोड के माध्यम से व्यापारी अलग-अलग सेवाओं के लिए एक ही क्यू आर कोड प्रदर्शित कर सकता है। उदाहरण के तौर पर व्यापारी को अलग-अलग मोबाइल एप्लीकेशन के अनुसार अलग अलग क्यूआर कोड प्रदर्शित करने होते थे, किंतु भारत क्यूआर कोड के माध्यम से व्यापारिक एक ही क्यूआर कोड का उपयोग कर अलग-अलग मोबाइल एप्लीकेशन से अपना डिजिटल भुगतान आसानी से प्राप्त कर सकेगा।

क्यूआर कोड:

क्यूआर कोड (त्वरित प्रतिक्रिया कोड) एक दो आयामी (मैट्रिक्स) मशीन पठनीय कोड है। यह काले और सफेद वर्ग से बना कोड है।

क्यूआर कोड ईमेल, वेबसाइट और फोन नंबर इत्यादि सामग्री के भंडारण के लिए उपयोग किया जाता है। इस कोड को एक स्मार्टफोन के कैमरे से पढ़ा जा सकता है।

क्यूआर कोड 7089 अंको को स्टोर करने में सक्षम है, जबकी पारंपरिक कोड अधिकतम 20 अंको को स्टोर कर सकता हैं।

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इंद्रधनुष 2.0: केंद्रीय पुनर्पूंजीकरण योजना

वर्ष 2017 में केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों हेतु व्यापक पुनर्पूंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ करने जा रही हैं.  “इंद्रधनुष 2.0” नामक इस योजना का मुख्य उद्देश्य गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के रूप में कुछ शीर्ष दोषी खाताधारकों की पहचान करते हुए पर्याप्त प्रावधान बनाना है.

इंद्रधनुष 2.0 महत्वपूर्ण तथ्य:

वर्ष 2017 में “इंद्रधनुष 2.0” के एसेट क्वालिटी की समीक्षा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाएगी.  केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट को निष्पक्ष और वैश्विक पूंजी पर्याप्तता नियम BASEL-III के तहत बनाना है.

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिसंबर 2015 में एसेट क्वालिटी समीक्षा प्रारंभ की गई थी, जिसे मार्च 2017 में समय बंद कार्यक्रम के तहत पूर्ण किया जाएगा.

केंद्र सरकार द्वारा ‘इंद्रधनुष’ कार्यक्रम की घोषणा वर्ष 2015 में सरकारी बैंको के 70,000 करोड़ रुपये की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के प्रेरणा स्वरुप लिया गया था.

वर्तमान समय में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वैश्विक जोखिम मापदंड BASEL-III के लिए आवश्यक 1.1 लाख करोड़ रुपए जुटाने की अनुमति प्रदान की गई है.

BASEL-III महत्वपूर्ण तथ्य:

BASEL-III बैंक पूंजी पर्याप्तता, बाजार में तरलता जोखिम और तनाव परीक्षण पर एक वैश्विक, स्वैच्छिक नियामक ढांचा है। यह वैश्विक जोखिम मापदंड वर्ष 2010-11 की बैंकिंग पर्यवेक्षण बासेल/BASEL समिति की सिफारिशों पर सहमति व्यक्त करती है.

यह मापदंड बैंक में जमा राशि व उधारी के विभिन्न रूपों के लिए भंडार के भिन्न स्तरों की जरूरतों पर आधारित है.

मार्च 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 31 मार्च 2019 तक BASEL-III (अंतरराष्ट्रीय मापदंड) के अनुसार अपनी सेवाएं देने के लिए दिशा निर्देश दिए.

BASEL-III से पूर्व व्यापक पुनर्पूंजीकरण प्रक्रिया हेतु BASEL-I और BASEL-II अंतर्राष्ट्रीय मानकों की पालना की जाती थी.

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