विशाखापट्टनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारा

सितंबर 2016 में भारत ने एशियाई विकास बैंक के साथ औद्योगिक गलियारे के 2,500 किलोमीटर लंबे क्षेत्र के विकास हेतु कुल 631 मिलियन डॉलर संधि की थी। इस समझौते के तहत 26 फरवरी 2017 को भारत और एशियाई विकास बैंक ने विशाखापट्टनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारे/East Coast Economic Corridor (ECEC) के 800 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को विकसित करने के लिए 375 मिलियन डॉलर संधि पर हस्ताक्षर समझौता किए। इस संधि के तहत एशियाई विकास बैंक, औद्योगिक गलियारे के साथ चार मुख्य केंद्र विशाखापट्टनम, काकीनाडा, अमरावती और श्रीकालहस्ती के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के निर्माण की सुविधा हेतु आर्थिक मदद करेगा।

इस संधि के तहत प्रथम किस्त के तौर पर कुल 245 मिलियन डॉलर दो मुख्य केंद्र विशाखापट्टनम और श्रीकालहस्ती को विकसित करने हेतु प्रदान किया गया है। यह संधि औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने हेतु औद्योगिक और क्षेत्रीय नीतियों का समर्थन करने और व्यापार कर को आसान बनाने में सहायक होगी।

विशाखापट्टनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारा:

ECEC पूर्वी तट के साथ भारत का प्रथम तटीय आर्थिक गलियारा होगा। यह कोलकाता, पश्चिमी बंगाल से कन्याकुमारी, तमिलनाडु तक लगभग 2,500 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा होगा।

यह गलियारा पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के वैश्विक मूल्य श्रंखला के साथ भारत को जोड़ने का मुख्य कार्य करेगा। साथ ही यह भारत की लंबी पूर्वी समुद्री तट और रणनीतिक बंदरगाहों को अंतराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के साथ जोड़ने का भी कार्य करेगा।

यह गलियारा केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना “Make in India” को आगे बढ़ाने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने में भी सहायक होगा।

यह गलियारा पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क के साथ घरेलू कंपनियों को जोड़ने और बंदरगाह औद्योगिकीकरण को भी बढ़ावा देगा। जनवरी 2016 में केंद्र सरकार ने बंदरगाह औद्योगिकीकरण हेतु सागरमला/SAGARMALA नामक एक केंद्रीय इकाई का गठन किया है।

एशियाई विकास बैंक:

19 दिसंबर 1966 को एक क्षेत्रीय विकास बैंक के रूप में एशियाई विकास बैंक की स्थापना की गई।

जिसका मुख्यालय मनीला, फिलिपिंस में स्थित है।

एशियाई विकास बैंक के कुल 67 सदस्य देश है, जिसमें से 48 एशिया और 19 एशिया के बाहरी देश हैं।

एशियाई विकास बैंक में वर्ष 2014 तक जापान कुल 15.7% के साथ सबसे बड़ा शेयर धारक देश है।

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भारत क्यूआर कोड: डिजिटल भुगतान तकनीक

23 जनवरी 2017 को केंद्र सरकार ने कार्ड स्वाइप मशीन के बिना डिजिटल भुगतान को ओर अधिक आसान और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। केंद्र सरकार ने “भारत क्यूआर कोड” नामक एक नई त्वरित प्रक्रिया (मूल्यांकन) कोड सेवा का शुभारंभ किया. भारत क्यूआर कोड अपनी तरह का दुनिया का पहला इंटर प्रचलित भुगतान स्वीकृति सेवा है। इंटर प्रचलित भुगतान स्वीकृति सेवा से तात्पर्य एक ऐसी डिजिटल सेवा, जिसमें अलग-अलग सेवा प्रदाता अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। इस केंद्रीय परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश में डिजिटल भुगतान को अधिक प्रभावी बनाना है।

भारत क्यूआर कोड

भारत क्यूआर कोड, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से निर्देश के तहत भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), वीसा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।

भारत क्यूआर कोड मास्टर कार्ड / वीजा / रुपे प्लेटफार्मों के लिए एक समन्वय इंटरफ़ेस प्रदान करता है।

भारत क्यूआर कोड आधार सक्षम भुगतान और एकीकृत भुगतान इंटरफेस जैसी सुविधाएं भी प्रदान करता है।

भारत क्यूआर कोड ग्राहक को बिना कार्ड स्वाइप मशीन के खुदरा विक्रेता की आईडी या नंबर पर डिजिटल भुगतान की सेवा प्रदान करता है।

वर्तमान समय में व्यापारी को अलग-अलग सेवाओं के तहत अलग-अलग क्यूआर कोड प्रदर्शित करने होते हैं, किंतु भारत क्यूआर कोड के माध्यम से व्यापारी अलग-अलग सेवाओं के लिए एक ही क्यू आर कोड प्रदर्शित कर सकता है। उदाहरण के तौर पर व्यापारी को अलग-अलग मोबाइल एप्लीकेशन के अनुसार अलग अलग क्यूआर कोड प्रदर्शित करने होते थे, किंतु भारत क्यूआर कोड के माध्यम से व्यापारिक एक ही क्यूआर कोड का उपयोग कर अलग-अलग मोबाइल एप्लीकेशन से अपना डिजिटल भुगतान आसानी से प्राप्त कर सकेगा।

क्यूआर कोड:

क्यूआर कोड (त्वरित प्रतिक्रिया कोड) एक दो आयामी (मैट्रिक्स) मशीन पठनीय कोड है। यह काले और सफेद वर्ग से बना कोड है।

क्यूआर कोड ईमेल, वेबसाइट और फोन नंबर इत्यादि सामग्री के भंडारण के लिए उपयोग किया जाता है। इस कोड को एक स्मार्टफोन के कैमरे से पढ़ा जा सकता है।

क्यूआर कोड 7089 अंको को स्टोर करने में सक्षम है, जबकी पारंपरिक कोड अधिकतम 20 अंको को स्टोर कर सकता हैं।

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