केंद्र सरकार और बैंकों की टर्नअराउंड योजना

25 मार्च 2017 को केंद्र सरकार ने बैंकिंग परिसंपत्ति गुणवत्ता की व्यवस्था को सुधारने के क्रम में 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निर्देशित किया है। इन निर्देशों के तहत बैंक अपने उधारदाताओं को अधिक पूंजी निवेश तभी प्रदान करेगा, जब उधारदाता अपने उधार उतारने संबंधी योजना (टर्नअराउंड योजना) समय-समय पर बैंक के साथ साझा करेगा। हमें ध्यान देना चाहिए कि हाल ही में कुछ बैंकों ने वित्त वर्ष 2015-16 में घाटे का मुख्य कारण बैंकिंग परिसंपत्ति के खराब होने को माना है, इसी क्रम में केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा रिपोर्ट के तहत बैंकों को बैंकिंग नियामक द्वारा पहचान किए गए कई खातों को बुरे खाते की श्रेणी में वर्गीकृत करने संबंधी आदेश जारी किए।

भारतीय रिजर्व बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा रिपोर्ट के तहत निकट भविष्य में बैंकों को अपनी बैलेंस शीट को अधिक स्पष्ट और कम क्रेडिट व्यवस्था ( मिशन इंद्रधनुष 2.0: अधिक पढ़ें) का समर्थन करने के लिए तैयार रहने पर भी जोर दिया गया है। भारतीय रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों की सकल गैर निष्पादित संपत्ति सितंबर 2016 तक सकल अग्रिमों की 9.1% तक बढ़ी, जो कि एक साल पहले की तुलना में 5.1% थी।

25 मार्च 2017 को केंद्र सरकार ने राज्य स्वामित्व वाले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मर्चेंट बैंकिंग शाखा “एसबीआई कैप्स” को केंद्र सरकार के साथ अपने उधारदाताओं के टर्नअराउंड योजना संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के आदेश जारी किए गए। केंद्र सरकार अग्रिम 3 वर्षों में देश के सभी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के निजी बैंकों को केंद्र सरकार के साथ अपने उधारदाताओं के टर्नअराउंड योजना में शामिल करने की योजना बना रही है।

इंद्रधनुष 2.0 महत्वपूर्ण तथ्य:

वर्ष 2017 में “इंद्रधनुष 2.0” के एसेट क्वालिटी की समीक्षा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाएगी। केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट को निष्पक्ष और वैश्विक पूंजी पर्याप्तता नियम BASEL-III के तहत बनाना है.

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