Current Affairs April 13, 2018

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Current Affairs April 13, 2018 को सभी अखबारों जैसे द हिंदू, द इकोनॉमिक टाइम्स, प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस और बिजनेस स्टैंडर्ड का अध्ययन कर तैयार किया गया है। यह जानकारी पाठक को UPSC, SSC, Banking, Railway और अन्य सभी प्रतियोगिता परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन में सहायक होगी।

IRNSS -1L इसरो ने नेविगेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा से IRNSS -1L नेविगेशन उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। सैटेलाइट सामान्य लिफ्ट-ऑफ के बाद PCLV-C 41 (44.4 मीटर की ऊंचाई और 321 टन वजन) के बोर्ड पर लॉन्च किया गया था और इसे सफलतापूर्वक नामित कक्षा में स्थापित किया गया। यह पीएसएलवी-एक्स्ट्रा लार्ज संस्करण की कुल 20 वीं उड़ान थी और पीएसएलवी के कुल 41 वां सफल सफल अभियान थे।

मुख्य तथ्य:

IRNSS -1L इसरो के नेविगेशन उपग्रह NavIC में शामिल होने वाला आठवां उपग्रह है। यह उपग्रह इसरो के साथ नेविगेशन उपग्रह में से प्रथम IRNSS -1 उपग्रह का स्थान ग्रहण करेगा। जिसने तीन रूबिडेयम परमाणु घड़ियों के असफल होने के कारण कार्य करना बंद कर दिया। IRNSS -1L को बेंगलुरु स्थित अल्फा डिज़ाइन टेक्नोलॉजीज द्वारा इसरो के सहयोग से बनाया गया था।

IRNSS:

भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) अमेरिका आधारित जीपीएस, रूस के ग्लोनस और गैलीलियो के समक्ष भारत द्वारा स्वदेशी तौर पर विकसित एक स्वतंत्र उपग्रह आधारित क्षेत्रीय प्रणाली है। इसे “NavIV / नेविच” (भारतीय नक्षत्र के साथ नेविगेशन) नाम दिया गया। नेविच प्रणाली सात उपग्रहों का समूह है (अर्थात् IRNSS -1 आई, 1 बी, 1 सी, 1 डी, 1 ई, 1 एफ और 1 जी) जिनमें से तीन भू-पत्तियां हैं और चार गैर-जियोस्टेशनरी हैं। यह विशेषकर देश की सीमाओं के आसपास के 1500 किमी क्षेत्र में वास्तविक स्थिति के 20 मीटर के भीतर स्थान की ट्रैकिंग प्रदान करता है।

पृष्ठभूमि:

कारगिल संघर्ष (1999) के बाद जल्द ही जीपीएस के साथ स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई, जब भारत को OSATL-आधारित नेविगेशन प्रणाली की बेहद जरूरत थी, लेकिन इसकी अपनी कोई भी नेविगेशन प्रणाली नहीं थी। यूएस प्रणाली उस समय उपलब्ध नहीं थी। वर्तमान में केवल यूएस (GPS) और रूस (Glonass) वर्तमान में पूरी तरह से चालू जीपीएस सिस्टम है चीन (Beidou) और यूरोप (Galileo) अभी भी अपनी पूरी व्यवस्था की तैनाती की प्रक्रिया में हैं।

Source: Business-Standard


आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक 2018:

अमेरिका स्थित द हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक 2018 का प्रकाशन किया गया। यह रिपोर्ट दुनिया के देशों में आर्थिक स्वतंत्रता की डिग्री को प्रतिबिंबित करती है।

इस रिपोर्ट में कुल 186 देशों की अर्थव्यवस्था में से भारत को 130 वा स्थान प्रदान किया गया। हमें ध्यान देना चाहिए कि वर्ष 2017 में भारत को 143 वा स्थान प्रदान किया गया था।

इस स्कोर की गणना के लिए बारह कारक हैं: संपत्ति के अधिकार, सरकारी अखंडता, कर का बोझ, न्यायिक प्रभावशीलता, सरकारी खर्च, वित्तीय स्वास्थ्य, व्यापारिक स्वतंत्रता, मौद्रिक स्वतंत्रता, श्रमिक स्वतंत्रता, व्यापार स्वतंत्रता, निवेश स्वतंत्रता और वित्तीय स्वतंत्रता।

इस रिपोर्ट के शीर्ष 10 देश हैं: हांगकांग, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, एस्टोनिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात।


भारत सरकार की पहली अपतटीय पवन परियोजना:

नई और नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान ने भारत की पहली अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजना की अभिव्यक्ति जारी की। इस परियोजना के तहत खंभात की खाड़ी में 1000 मेगावाट ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजना को विकसित किया जाएगा।

इस परियोजना के प्रथम चरण को गुजरात के पीपावाव बंदरगाह से 23-40 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया जाएगा।

यह परियोजना भारत को पवन के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा को प्राप्त करने में सहयोग करेगी। हमें ध्यान देना चाहिए कि दक्षता के मामले में अपतटीय पवन ऊर्जा तटवर्ती हवा से बेहतर होती है।

नई और नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय वर्ष 2022 तक पवन के माध्यम से 5000 मेगावाट ऑफशोर पवन ऊर्जा स्थापित करने की योजना बना रहा है। इसके लिए चेन्नई स्थित राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान नोडल एजेंसी के रूप में आवश्यक अध्ययन और सर्वेक्षण का कार्य कर रहा है।

Source: Economic Times


विश्व की प्रथम लंबी दूरी की विद्युत (बैटरी संचालित) बस सेवा

12 अप्रैल 2018 को पेरिस में विश्व की प्रथम लंबी दूरी की विद्युत (बैटरी संचालित) बस सेवा का शुभारंभ किया गया।

यह बस सेवा फ्लिक्सबस द्वारा यूरोप में इंटर सिटी बस सेवा के रूप में प्रारंभ की गई है।

इस सेवा को प्रथम चरण के तहत फ्रांस के उत्तरी शहर अमियंस और पेरिस के मध्य संचालित किया जाएगा।

इन बसों का निर्माण चीनी बस निर्माता BYD द्वारा किया गया।

Source: DDNews

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Seema Charan

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