Rulers of Amber

Major & Important facts about Rulers of Amber

कच्छावा शासकों ने अंबर पर शासन किया था, जिसे बाद में जयपुर राज्य के नाम से जाना जाने लगा। वर्ष 1561 में अंबर के प्रमुख शासक भारमल कच्छवाहा ने सम्राट अकबर से सहायता मांगी थी। जिसके उपरांत तत्कालीन प्रमुख भारमल कच्छवाहा को औपचारिक रूप से एक राजा की उपाधि प्रदान की गई।

अंबर के कछावा शासक

राजा बीजलदेव (1146-1799)

राजधानी को अंबर में स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसके उपरांत शासकों को अंबर का राजा कहा जाने लगा।

राजा राजदेव (1179-1216)

राजा खिलानदेव (1216 – 1276)

राजा कांटलदेव (1276 – 1317)

राजा जनसेदेव (1317 – 1366)

राजा उदयकरण / उदयकर्णा (1366 – 1388)

राजा नरसिंहदेव (1388 – 1413)

राजा बनबिशींन्हा (1413 – 1424)

राजा उधराओ (1424 – 1453)

राजा चंद्रसेन (1453-1502)

राजा पृथ्वीराज सिंह (1502-1527)

राजा पुराणमल (1527-1534)

राजा भीम सिंह (1534-1537)

राजा रतन सिंह (1537-1548)

राजा भारमल (1548-1574)

इन्होंने अपनी पुत्री का विवाह मुगल सम्राट अकबर से किया था।

राजा भगवानदास (1574-1589)

मिर्जा राजा मानसिंह प्रथम (1589 – 1614)

इन्होंने महाराणा प्रताप के खिलाफ सम्राट अकबर की तरफ से हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा था।

मिर्जा राजा भाव सिंह (1614 – 1621)

मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम (1621 – 1667)

इन्हें मुगल सम्राट औरंगजेब की तरफ से मराठा राजा शिवाजी से युद्ध लड़ने के लिए नियुक्त किया गया था। इन्होंने पुरंदर की संधि की थी।

मिर्जा राजा राम सिंह प्रथम (1667 – 1688)

मिर्जा राजा बिशन सिंह (1688 – 1699)

Seema Charan

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