ग्वादर बंदरगाह और पाकिस्तानी रणनीति

21 अप्रैल 2017 को पाकिस्तान ने अपने रणनीतिक ग्वादर बंदरगाहों की 40 साल की अवधि के लिए चीन द्वारा संचालित चीनी फर्म, चीन ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग कंपनी (सीओपीएचसी) को हस्तांतरित किया। वर्ष 2013 से ग्वादर बंदरगाह का संचालन संभाल रही, सीओपीएचसी पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित बंदरगाह पर सभी विकास कार्यों को अवधि के दौरान तैयार करेगी। पाकिस्तानी सरकार और कंपनी के अनुबंध के अनुसार टर्मिनल और समुद्री कार्यों के सकल राजस्व से 91% हिस्सेदारी और फ्री ज़ोन ऑपरेशन के सकल राजस्व से 85% हिस्सेदारी सीओपीएचसी को मिलेगी। जबकि राजस्व संग्रहण में बलूचिस्तान प्रांत का कोई भी हिस्सा नहीं होगा। पूर्व में कराची पाकिस्तान का प्रमुख बंदरगाह था किंतु ग्वादर बंदरगाह के उपरांत कराची बंदरगाह पर पाकिस्तानी व्यापार भार कम हो जाएगा।

ग्वादर बंदरगाह महत्वपूर्ण तथ्य

ग्वादर पोर्ट पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ग्वादर में अरब सागर पर स्थित एक गर्म पानी, गहरे समुद्र का बंदरगाह है। यह फारस की खाड़ी के मुहाने पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर स्थित है। यह 57 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) योजना के दक्षिणी पाकिस्तान हब की विशेषता है। यह चीनी वन बेल्ट, वन रोड पहल और समुद्री सिल्क रोड परियोजना के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में माना जाता है।

ग्वादर बंदरगाह चीन को तेल-समृद्ध पश्चिम एशिया और अफ्रीका के लिए सबसे छोटा मार्ग प्रदान करता है, जहां बंदरगाह चीनी तेल पाइप लाइनों के माध्यम से चीन के झिंजियांग प्रांत को तेल और गैस परिवहन का मुख्य स्रोत भी है। यह बंदरगाह चीन की सुरक्षा गतिशीलता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ग्वादर बंदरगाह भारत के लिए गंभीर रणनीतिक प्रभाव भी उत्पन्न करता है यह बंदरगाह फ़ारसी की खाड़ी और एडेन की खाड़ी के आसपास भारतीय नौसैनिक गतिविधियों में भी दखल की संभावनाओं को बढ़ाता है। भारत को यह आशंका है कि इन बंदरगाहों का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।

Seema Charan

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