मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक 2016

10 मार्च 2017 को भारतीय संसद ने सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में कार्यरत महिलाओं को लाभ प्रदान हुए मातृत्व अवकाश अवधि 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दी। इस संबंध में संसद ने मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक 2016 को सर्वसम्मति से पारित किया। इस विधेयक के पारित होने के उपरांत भारत विश्व का तीसरा सबसे अधिक मातृत्व अवकाश (26 सप्ताह) प्रदान करने वाला देश बन गया है। हमें ध्यान देना चाहिए कि कनाडा (50 सप्ताह) और नॉर्वे (44 सप्ताह) विश्व में सर्वाधिक मातृत्व अवकाश प्रदान करने वाले देश है।

मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक 2016 के विशेष तथ्य:

यह विधेयक मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 में संशोधन की अनुशंषा करता है. मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 देश में मातृत्व के दौरान महिलाओं को रोजगार की सुरक्षा प्रदान करता है साथ ही उन्हें मातृत्व लाभ के अधिकार प्रदान करता है।

यह विधेयक, महिलाओं को प्रथम दो बच्चों के लिए 26-26 सप्ताह के मातृत्व अवकाश के अधिकार प्रदान करता है, जबकि दो से अधिक बच्चों वाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह प्रदान करने का भी अधिकार प्रदान करता है।

इस विधेयक के अनुसार, यदि एक महिला 3 माह की उम्र से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती है, तो वह महिला 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश के लिए हकदार होगी।

यह विधेयक कमीशनिंग मां को जैविक मां के रूप में परिभाषित करता है, जो किसी अन्य महिला में भ्रूण बनाने के लिए अपने अंडे का उपयोग करती है।

यह विधेयक महिलाओं को क्रैच सुविधाएं भी प्रदान करता है। अर्थात 50 से अधिक कर्मचारियों के साथ प्रत्येक प्रतिष्ठान को काम कर रहीमाताओं के लिए क्रेश सुविधाएं प्रदान करनी होगी, साथ ही मां को क्रेच में बच्चे को देखभाल और खिलाने के लिए काम के दौरान चार यात्राओं की अनुमति दी जाएगी।

यह विधेयक प्रतिष्ठान को संबंधित कानून की जानकारी अपनी महिला कर्मचारियों को प्रदान करने के आदेश देता है। ऐसी सूचना इलेक्ट्रॉनिक या लिखित में दी जानी चाहिए।

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Seema Charan

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