भारत-आधारित न्यूट्रीनो ऑब्ज़र्वेटरी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दक्षिणी खंड ने तमिलनाडु के थेनी में बनने वाले भारत-आधारित न्यूट्रीनो ऑब्ज़र्वेटरी (आईएनओ) की पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) को निलंबित कर दिया है।

निलंबन का मुख्य कारण:

ट्रिब्यूनल के अनुसार, यह परियोजना तमिलनाडु और केरल की सीमा पर प्रस्तावित है, जो केरल के Idukki जिले में Mathikettan Shola राष्ट्रीय उद्यान प्रस्तावित परियोजना स्थल से लगभग 4.9 किमी की दूरी पर स्थित होगी। जिस वजह से यह परियोजना श्रेणी ‘ए’ की परियोजना मानी जाएगी।

नियम क्या कहते हैं ?

पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के तहत, यदि कोई परियोजना 2 राज्यों की सीमाओं पर या अधिसूचित राष्ट्रीय उद्यान के 5 किलोमीटर के क्षेत्र में प्रस्तावित है तो इसे ‘ए’ श्रेणी का प्रोजेक्ट माना जाएगा। जिसके क्रियान्वयन हेतु कई स्तरों पर सिद्धांतिक मंजूरी लेना अतिआवश्यक है।

पृष्ठभूमि:

पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना को ‘बी’ श्रेणी की परियोजना माना, जिसके तहत पर्यावरण प्रभाव आकलन किया जाना आवश्यक नहीं होता है।

न्यूट्रीनो ऑब्ज़र्वेटरी के मुख्य तथ्य:

•  भारत आधारित न्यूट्रीनो वेधशाला (आईएनओ) परियोजना एक बहु-संस्थागत प्रयास है, जिसका उद्देश्य भारत में गैर-त्वरक आधारित उच्च ऊर्जा और परमाणु भौतिकी अनुसंधान के लिए लगभग 1200 मीटर की विश्व स्तरीय भूमिगत प्रयोगशाला का निर्माण करना है।

•  इस परियोजना के तहत तमिलनाडु के थेनी जिले की पश्चिमी पहाड़ियों में भूमिगत प्रयोगशाला का निर्माण किया जाएगा।

•  इस परियोजना के तहत न्यूट्रिनो का अध्ययन किया जाएगा।

•  न्युट्रीनो एक मूलभूत कण है, जो लेप्टन परिवार (इलेक्ट्रॉन-जैसे कण) से संबंधित है।

•  यह कण भौतिकी के मानक मॉडल के अनुसार द्रव्यमान रहित होता है, किंतु हाल ही के प्रयोगों से पता चला है कि न्यूट्रिनो एक अज्ञात द्रव्यमान से बना होता है।

•  वैज्ञानिक भूमिगत प्रयोगशाला के माध्यम से इसी अज्ञात द्रव्यमान का अध्ययन करना चाहते हैं।

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Seema Charan

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