एडमिरल्टी विधेयक 2016

एडमिरल्टी (न्यायिक क्षेत्र और समुद्री दावा निपटान) विधेयक, 2016 हाल ही में लोक सभा द्वारा पारित किया गया है। यह विधेयक नौसेना जल क्षेत्र में दुर्घटना के मामलों और पानी पर वाणिज्य संबंधी अनुबंधों को शामिल करता है। यह बिल औपनिवेशिक कालीन एडमिरल्टी कोर्ट एक्ट -1840, एडमिरल्टी कोर्ट एक्ट -1861, एडमिरल्टी अधिनियम के औपनिवेशिक न्यायालय -1890, एडमिरल्टी अधिनियम (भारत) के औपनिवेशिक न्यायालय -1890, और पत्र पेटेंट के प्रावधान -1865 कानूनों को निरस्त करता है।

एडमिरल्टी विधेयक 2016 का उद्देश्य:

यह विधेयक न्यायालयों के एडमिरल्टी क्षेत्राधिकार से संबंधित मौजूदा कानूनों को समेकित करने, समुद्री दावों पर नौसेना की कार्यवाही जैसे जहाजों की गिरफ्तारी आदि से संबंधित मुद्दों को शामिल करता है। यह विधेयक उन सभी पुराने नियमों को बदलने में सक्षम है, जो कुशल प्रशासन में बाधा रखते हैं।

एडमिरल्टी विधेयक की मुख्य विशेषताएं:

वर्तमान समय में एडमिरल्टी का अधिकार क्षेत्र मुंबई, कोलकाता और मद्रास उच्च न्यायालय के पास है।
इस विधेयक के तहत समुद्री दावों के संबंध में अधिकार क्षेत्र संबंधित उच्च न्यायालयों के पास होगा।
केंद्र सरकार इन उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार का विस्तार करने में सक्षम होगी।
यह विधेयक कर्नाटक, गुजरात, उड़ीसा, केरल, हैदराबाद और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी भी अन्य उच्च न्यायालय के के क्षेत्राधिकार को बढ़ाता है।

समुद्री दावों से तात्पर्य:

वर्तमान समय में मुंबई, कोलकाता और मद्रास उच्च न्यायालय समुद्री दावा पर फैसला सुनाने में सक्षम है। जो इस प्रकार है:
(I) एक पोत के स्वामित्व के संबंध में विवाद,
(Ii) पोत के रोजगार या आय के संबंध में किसी जहाज के सह-मालिकों के बीच विवाद,
(Iii) किसी पोत पर बंधक,
(Iv) पोत के निर्माण, मरम्मत या रूपांतरण,
(V) किसी जहाज की बिक्री से उत्पन्न विवाद,
(Vi) पोत के कारण पर्यावरणीय क्षति, आदि।
यह विधेयक, यांत्रिक रूप से प्रेरित ना होने वाले जहाज या नाव को नौकायन पोत के रूप में परिभाषित करता है।

भारत एक समुद्री राष्ट्र है, जो अपनी 95% व्यापारिक गतिविधियों के लिए समुद्री परिवहन पर निर्भर हैं। एडमिरल्टी से तात्पर्य समुद्र और जल मार्ग से परिवहन के साथ जुड़े दावों के संबंध में उच्च न्यायालय की शक्तियों से है। भारत में सांविधिक रूपरेखा के तहत ब्रिटिश काल से 5 एडमिरल्टी न्याय क्षेत्र प्रभावी है। वर्तमान समय में केंद्र सरकार ने ब्रिटिशकालीन एडमिरल्टी व्यवस्था को समाप्त करते हुए एडमिरल्टी विधेयक 2016 पारित किया।

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Seema Charan

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